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The rivalry between Australia and South Africa has always been fiery.
But this series? It’s shown us how quickly the tide can turn in cricket.
At Mackay’s Great Barrier Reef Arena, the Aussies walked in for the 3rd and final ODI knowing the truth—
👉 the series was already gone.
South Africa had crushed them in the first two games:
- 98 runs in the opener
- 84 runs in the second
This last match may have been a “dead rubber” on paper, but in reality it was about pride, confidence, and redemption.
Australia’s Gamble
Mitchell Marsh finally broke a long streak.
After 21 matches of fielding first, he chose to bat after winning the toss.
Symbolic? Absolutely.
It felt like a reset button, a chance to seize control early.
But intent alone doesn’t win matches—execution does.
South Africa’s Swagger
For South Africa, this was a victory lap.
The Proteas had already pocketed the series, but they had more to celebrate.
The name on everyone’s lips? Matthew Breetzke.
- First cricketer in ODI history to score 50+ in each of his first four innings
- Calm, consistent, fearless—Breetzke is suddenly the face of South Africa’s future
For a team long criticized for inconsistency, this was a statement of intent.
Australia’s Struggles
The Aussies, meanwhile, looked unsettled.
- Injuries weakening their balance
- Retirements leaving gaps in leadership
- Middle-order collapses under pressure
Their biggest weapon—the bowling attack—looked flat.
And that raised tough questions:
👉 Who steps up when the legends are gone?
👉 Can this squad find its rhythm before the next big ICC tournament?
The Mackay Atmosphere
If you thought a “dead rubber” meant low interest—think again.
- Sell-out crowd in Mackay
- Over 40,000 fans across the series
- Every run, every wicket, celebrated like a World Cup final
For a city that rarely hosts international cricket, this was history in the making.
The Bigger Picture
This wasn’t just another bilateral series.
- South Africa suddenly look like a side with balance, firepower, and young stars ready to shine.
- Australia are staring at uncomfortable truths—their depth is being tested, and leadership is under scrutiny.
For South Africa, a whitewash would be a loud message: we’re back.
For Australia, even a consolation win would matter: we’re not done yet.
And that’s the beauty of cricket rivalries—
👉 They’re never really dead rubbers.
👉 Every ball, every milestone, carries meaning far beyond the scoreboard.
AUS vs SA तीसरा वनडे 2025: साउथ अफ्रीका की नज़र व्हाइटवॉश पर, ऑस्ट्रेलिया खेलेगा इज़्ज़त के लिए

ऑस्ट्रेलिया और साउथ अफ्रीका की भिड़ंत हमेशा रोमांच से भरी रही है।
लेकिन इस बार सीरीज़ ने बता दिया कि क्रिकेट में पासा कितनी जल्दी पलट सकता है।
मैकाय के ग्रेट बैरियर रीफ़ एरीना में तीसरा और आख़िरी वनडे खेला जा रहा है।
👉 सच तो ये है कि सीरीज़ पहले ही साउथ अफ्रीका जीत चुका है।
पहले दो मैचों में ऑस्ट्रेलिया बुरी तरह हारा —
- पहला मैच: 98 रन से
- दूसरा मैच: 84 रन से
काग़ज़ पर भले ही ये “डेड रबर” हो, लेकिन असल में ये है इज़्ज़त, आत्मविश्वास और वापसी की जंग।
ऑस्ट्रेलिया का दांव
कप्तान मिचेल मार्श ने आखिरकार अपनी लंबी आदत तोड़ी।
लगातार 21 बार पहले गेंदबाज़ी चुनने के बाद, इस बार उन्होंने टॉस जीतकर पहले बल्लेबाज़ी करने का फ़ैसला लिया।
ये सिर्फ़ टॉस का फ़ैसला नहीं था—
👉 ये एक रिसेट बटन था, कंट्रोल वापस लेने की कोशिश।
साउथ अफ्रीका का जलवा
उधर प्रोटियाज़ पहले से ही सीरीज़ जेब में डालकर उतरे थे।
लेकिन उनके पास जश्न का एक और कारण था।
सबसे बड़ा नाम? मैथ्यू ब्रीट्ज़के।
- वनडे इतिहास में पहले खिलाड़ी बने जिन्होंने लगातार शुरुआती चार पारियों में 50+ स्कोर बनाया।
- निडर, शांत और लगातार रन बनाने वाले—ब्रीट्ज़के अब साउथ अफ्रीका की नई पहचान हैं।
ये टीम, जिसे अक्सर अस्थिर कहा जाता था, अब मजबूती और संतुलन दिखा रही है।
ऑस्ट्रेलिया की मुश्किलें
दूसरी ओर ऑस्ट्रेलिया बिखरा हुआ नज़र आया।
- चोटें टीम बैलेंस बिगाड़ रहीं
- रिटायरमेंट्स से अनुभव की कमी
- मिडिल ऑर्डर बार-बार ढहना
गेंदबाज़ी, जो उनकी सबसे बड़ी ताक़त रही है, इस सीरीज़ में बेरंग दिखी।
सवाल सीधे-सीधे हैं:
👉 जब बड़े खिलाड़ी नहीं हैं, तो कौन आगे आएगा?
👉 क्या ये टीम अगले बड़े टूर्नामेंट से पहले लय पकड़ पाएगी?
मैकाय का माहौल
अगर आप सोच रहे थे कि “डेड रबर” का मतलब खाली स्टेडियम है—तो ग़लत हैं।
- स्टेडियम पूरी तरह हाउसफुल
- सीरीज़ में अब तक 40,000 से ज़्यादा दर्शक
- हर रन, हर विकेट पर शोर जैसे ये कोई वर्ल्ड कप फ़ाइनल हो
मैकाय के लिए ये दिन हमेशा याद रहेगा।
बड़ी तस्वीर
ये सीरीज़ सिर्फ़ स्कोरबोर्ड पर दर्ज जीत-हार नहीं है।
- साउथ अफ्रीका ने दिखाया कि अब उनके पास बैलेंस, टैलेंट और स्टार खिलाड़ी हैं।
- ऑस्ट्रेलिया को अपनी कमज़ोरियों से आंखें मिलानी होंगी—गहराई पर सवाल है, कप्तानी पर दबाव है।
👉 साउथ अफ्रीका के लिए व्हाइटवॉश एक बड़ा संदेश होगा: हम वापसी कर चुके हैं।
👉 ऑस्ट्रेलिया के लिए सिर्फ़ एक जीत भी मायने रखेगी: हम अभी ख़त्म नहीं हुए।
और यही तो क्रिकेट की खूबसूरती है—
हर मैच, हर गेंद, हर उपलब्धि सिर्फ़ स्कोरकार्ड तक सीमित नहीं रहती।
ये खिलाड़ियों और फैंस की भावनाओं का आईना बन जाती है।